Shree Geeta Gaushala · Jorhat
Gaushala Bhajan
गौशाला भजन

Album
Gaushala Bhajan
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Bhajan Prathana
भजन प्रार्थना
Recording from Shree Geeta Gaushala. Words are the trust prayer sheets.
सर्वमंगल प्रार्थना
ॐ जय श्री राम
ॐ अनन्त ब्रह्माण्डों की जननी
परम श्रद्धेय गौमाता
पूर्ण समर्पित इस जीवात्मा का
सादर प्रणाम स्वीकार करें।
प्रिय करुणामयी माते !
विश्व के समस्त मंदिरों में
पुनः धर्म जागृति का संचार करके
सर्वत्र सनातन धर्म व श्री राम राज्य
पुनः स्थापित करने की कृपा
अतिशीघ्र करें।
ॐ जय श्री गौ माताय शरणं प्रपद्ये
सर्वमंगल प्रार्थना
ॐ जय श्री राम
ॐ अनन्त ब्रह्माण्डों के स्वामी
परम श्रद्धेय परमात्मा
पूर्ण समर्पित इस जीवात्मा का
सादर प्रणाम स्वीकार करें।
प्रिय करुणासागर प्रभु !
विश्व के समस्त मंदिरों में
पुनः धर्म जागृति का संचार करके
सर्वत्र सनातन धर्म व श्री राम राज्य
पुनः स्थापित करने की कृपा
अतिशीघ्र करें।
ॐ जय श्री गोविंद गोपालय शरणं प्रपद्ये
विश्व मंगल प्रार्थना
ॐ जय श्री राम
अनन्त ब्रह्माण्डों को धारण करने वाले,
अनन्त प्राणियों का पालन पोषण करने वाले,
परम श्रद्धेय परमात्मा की हम शरण स्वीकार करके,
वन्दना करते हैं कि
प्रिय करुणासागर प्रभु !
मानव मात्र में सद्भावना जागृत करके,
सर्वत्र सनातन धर्म व श्रीरामराज्य
पुनः स्थापित करने की
कृपा अतिशीघ्र करें।
ॐ जयश्री गोविंदगोपालाय शरणं प्रपद्येः
तत्त्वज्ञान प्रार्थना
ॐ अनन्त ब्रह्माण्डों के स्वामी प्यारे परमात्मा !
अज्ञानवश आप से भिन्न माने गये,
मेरे मिथ्या अस्तित्व का नाश कर,
मुझे अपनी शरण में रखते हुए,
इस काया से विश्व का अधिकतम उपकार
करवाने की कृपा अतिशीघ्र करें।
प्यारे प्रभु ! ये तन-मन-धन और बुद्धि
मेरे नहीं आपके हो चुके हैं।
कृपा कर पूर्ण रूप से समर्पित
इस जीवात्मा का सादर प्रणाम स्वीकार करते हुए,
आपका भजन हमेशा होते रहने की अनुकम्पा करें।
हे नाथ ! विश्व के समस्त गौवंश के सुचारु प्रतिपालन से
सनातन धर्म की रक्षा करते हुए,
गीता ज्ञान द्वारा सभी मनुष्यों को
सात्विक आहारी, समतायुक्त और त्यागी बनाकर,
सर्वत्र आपकी जय-जयकार मनाने का
सामर्थ्य प्रदान करें।।
ॐ जयश्री गोविंद गोपालाय शरणं प्रपद्येः
पूर्ण समर्पण प्रार्थना
प्यारे प्रभु प्रसन्न होकर, हमको शरण में लीजिये।
हम आपको कभी भूलें नहीं, ऐसी कृपा कीजिये।
अज्ञान का हो नाश गीता ज्ञान हमको दीजिये।
प्यारे प्रभु प्रसन्न होकर, हमको शरण में लीजिये।
(1) हम मात-पिता, गुरु, गोमाता की, निःस्वार्थ भाव से सेवा करें।
हम धर्मपरायण तत्त्वज्ञानी होकर, इस जग का उपकार करें।
प्यारे प्रभु हमें ऐसी आप करुणा कीजिये।
प्यारे प्रभु हमें ऐसा सच्चाज्ञान दीजिये।
(2) हम आप पर श्रद्धा विश्वास कर, सभी को तत्त्वज्ञान सिखलायें।
हम राग, द्वेष, काम, क्रोध, मद, लालच से मुक्त हों।
प्यारे प्रभु हमें ऐसी सद्बुद्धि तो दीजिये।
प्यारे प्रभु हमें ऐसी सत्संग आप दीजिये।।
(3) हम अहिंसा के द्वारा, सनातन धर्म की रक्षा कर सत्यवादी बनें।
हम मन में संतोष धर, सर्वत्र आपका दर्शन करें।
प्यारे प्रभु हमें ऐसी विवेकशक्ति दीजिये।
प्यारे प्रभु हमें ऐसी प्रगाढ़भक्ति दीजिये।।
(4) हम सभी को समता त्याग सिखा, सात्विक आहारी बना सकें।
हम तन, मन, धन, व वक्त का, सही उपयोग निभा सकें।
प्यारे प्रभु हमें ऐसी मधुरवाणी दीजिये।
प्यारे प्रभु हमें ऐसी आप कृपा कीजिये।।
(5) हम पूर्ण आनन्दित होकर, सदा प्रेम से आपका सुमिरण करें।
हम जीवन आपको अर्पण कर, कामनाओं का त्याग करें।
प्यारे प्रभु हमें ऐसा आशीर्वाद दीजिये।
प्यारे प्रभु हमें ऐसी आप दया कीजिये।
(6) हम आत्मा को परमात्मा मान, मनसे मोहको छोड़ सकें।
निज अस्तित्व आप में लीन कर, जीतेजी शांति पा सकें।
प्यारे प्रभु हमें ऐसा वैराग्य उत्तम दीजिये।
प्यारे प्रभु हमें ऐसा माधुर्यभाव दीजिये।।
(7) हम गोवंश का प्रति पालन कर, आपकी जय जयकार करें।
प्यारे प्रभु हमें ऐसा आप सामर्थ्य दीजिये।
प्यारे प्रभु हमें शरण में लेकर, ये प्रार्थना स्वीकार करें।
प्यारे प्रभु प्रसन्न होकर, हमको शरण में लीजिये।
ॐ जय श्री रामाय, जय श्री रामाय, जय श्री रामाय, शरणं प्रपद्ये
श्री गणेश वंदना
वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभः।
निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा॥
सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
यया सर्वमिदं व्याप्तं जगत् स्थावरजङ्गमम्।
तां धेनुं शिरसा वन्दे भूतभव्यस्य मातरम्॥
मंत्र पुष्पांजलिं समर्पयामि॥
गोमाता आरती
ॐ जै जै गोमाता मैया जै जै गोमाता।
निसदिन तुमको ध्यावत, हरि, शिवजी, धाता॥ ॐ जै जै
मंथन समुद्र को कीन्हो, तब प्रगटी मैया।
ऋषिमंडल ने लीन्हो, कामधेनु गैया॥ ॐ जै जै
कोटि तैंतीस देवता, रोम रोम में बसे।
पंचगव्य जो लेता, जन्मों के पाप नशे॥ ॐ जै जै
सर्वौषधि भंडारी, तु ही है मैया।
घर भी कहे उसी को, जिय आँगन गैया॥ ॐ जै जै
संकट उनके हरती, पार वैतरणी करे।
तेरी पूँछ धरे जो, भवसागर से तरे॥ ॐ जै जै
तेरे खुर की धूरि, माथे पे जो लगावे।
तीर्थस्नान का फल हो, पद पद विजय मिलावे॥ ॐ जै जै
श्री कृष्ण बसे माँ तुझमें, तुमको जो ध्यावे।
मन इच्छा हो पूरी, मानव तन पावे।
गौ माता की आरती, प्रीत से जो गावे।
कह गोपाल मैं शरण हूँ, महिमा नित पावे॥ ॐ जै जै
ॐ जै जै गोमाता मैया जै जै गोमाता।
